Saturday, February 9, 2013

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी
तू कभी बहुत दूर कभी पास लगी 
कभी प्यासी और कभी प्यास लगी 
कभी कोमल लगी फूलों की तरह 
और कभी काटों का अहसास लगी ।

ऐ जिंदगी 
तू कभी खिलखिलाती कभी उदास लगी
कभी बेमानी और कभी ख़ास लगी
कभी लगी तू बेवज़ह का सफ़र
और कभी हर चीज़ की वज़ह सी लगी ।

ऐ जिंदगी
तू कभी निराशा और कभी आस लगी
कभी धोखा और कभी विश्वास लगी
कभी लगी तू जीते जी सज़ा मुझको
और कभी ख़ुदा की दुआ सी लगी ।

वक़्त


वक़्त करवट बदल रहा है फिर 
कोई गिर कर संभल रहा है फिर ।


आज फिर कुछ खुदा से माँगा है 
कोई घर से निकल रहा है फिर ।


आँख से चाँद आंसू टपके हैं 
कोई सपना पिघल रहा है फिर ।


आँख नाम हैं कि लब जमे से हैं 
कोई बिछड़ों से रहा है फिर ।


आज कुछ लोगो मुझको समझाओ 
कोई अरमां मचल रहा है फिर ।