Monday, August 5, 2013

वक़्त गुज़रा
और कुछ भी तो नहीं बदला
जैसे मेरा आज
मेरे कल मैं है पिघला

देख ज़रा
वहीँ खड़ा है सारा मंज़र
वहीँ खड़ी है मेरी नज़र
जहां तूने छोड़ा था
कहीं कुछ नहीं चला

सिवाय तेरे वायदों के
जो होते तो हैं पर
निभाए नहीं जाते

जो चलते तो हैं पर
कहीं पहुँच नहीं पाते

-शिव
ज़िन्दगी दब गयी बाज़ार के उधारों में
खुशियाँ बिकने लगीं जबसे इश्तिहारों में

उम्र अपनी जो औरों के नाम कर दे यहाँ
कोई मिलता है कभी सैकड़ों हज़ारों में

तुमने ठुकराया तो कोई भी चर्चा न हुआ
हम तनिक रूठे और छप गए अखबारों में

अपनी पहचान भी मैं भूल गया लगता हूँ
ज़िन्दगी ढल गयी मुख्तलिफ किरदारों में

रकीब सब हुए; सच बोलने लगा जबसे
लोग गिनते हैं मुझे पागलों, बीमारों में

-शिव
Photo: आज रात बड़ी तनहा है 
आज की रात रोई लगती है 
किसी से बिछड़ गयी शायद 
बहुत खोई खोई लगती है 

उफ़ ये गर्म हवा; ये चांदनी की तपिश 
जैसे शोलों ने इन्हें फूँका हो 
जिस्म-ओ-जाँ दोनों जले जाते हैं 
जैसे भट्टी मैं इन्हें झोंका हो 

ये समंदर के किनारे फैली बालू 
जैसे बिखरे हों ख्याल मेरे 
ये किनारे हैं के चलते जाते हैं 
जैसे ज़ेहन में सवाल मेरे 

कितना खामोश है समंदर भी 
जैसे राह तकता हो तूफानों की 
मेरा दिल है के भरा आता है 
आंधियां जैसे हों अरमानों की 

आज की रात और मेरा दिल 
फर्क कोई नहीं है दोनों में 
ये भी रोई है; मैं भी रोया हूँ 
ये भी खोई है; मैं भी खोया हूँ 
आज की रात बड़ी तनहा है 

-शिव
आज रात बड़ी तनहा है 
आज की रात रोई लगती है 
किसी से बिछड़ गयी शायद 
बहुत खोई खोई लगती है 

उफ़ ये गर्म हवा; ये चांदनी की तपिश 
जैसे शोलों ने इन्हें फूँका हो 
जिस्म-ओ-जाँ दोनों जले जाते हैं 
जैसे भट्टी मैं इन्हें झोंका हो 

ये समंदर के किनारे फैली बालू 
जैसे बिखरे हों ख्याल मेरे 
ये किनारे हैं के चलते जाते हैं 
जैसे ज़ेहन में सवाल मेरे 

कितना खामोश है समंदर भी 
जैसे राह तकता हो तूफानों की 
मेरा दिल है के भरा आता है 
आंधियां जैसे हों अरमानों की 

आज की रात और मेरा दिल 
फर्क कोई नहीं है दोनों में 
ये भी रोई है; मैं भी रोया हूँ 
ये भी खोई है; मैं भी खोया हूँ 
आज की रात बड़ी तनहा है 

-शिव

मैं जानता हूँ
तू मुझसे खफ़ा खफ़ा सा रहता है
नज़र नज़र मिली जहाँ
छुपा छुपा सा रहता है

और मैं भी देख तो
खुश कहाँ ग़मगीन हूँ
जाने क्यूं मेरा भी दिल
भरा भरा सा रहता है

तेरे मेरे दरमियाँ
बस आबरू का ये पर्दा
मुस्कुराता रहता है

तू खफ़ा है मैं दुखी
बस भरम है हर ख़ुशी
फिर भी देख तो ज़रा
ये सब छुपाता रहता है

आबरू का ये पर्दा
अपना अब सहारा है
ये ही तल्ख़ रिश्तों का
सूखा हुआ धारा है

तेरी मेरे जीवन का
ये ही बस किनारा है

-शिव
ये वक़्त ये नसीब
जैसे क़र्ज़ माँगा हो
और इस क़र्ज़ को
चुकाऊँ तो चुकाऊँ कैसे

जीता तो हूँ पर
ज़िन्दगी मेरी नहीं
कमी सब कुछ और लगता है
कोई कमी भी नहीं

ये अन्धेरा और
रौशनी का कोई सुराग़ नहीं
मेरे सवालों का
कोई भी जवाब नहीं

ऐ! ख़ुदा कोई राह दिखा
अब तो लगता है

इस रात की
कोई सुबह ही नहीं
और इस आज का
कोई कल ही नहीं

-शिव

तू जो मुझको बताता है सच ऐसा नहीं होता
तू जैसा नज़र आता है सच ऐसा नहीं होता

जुबां अटकी निगाहें चोर और अंदाज़ बहका सा
ये क्या मुझको सुनाता है सच ऐसा नहीं होता

सच की हर आवाज़ में आवाज़ है उस की
तू बस फितने उठाता है सच ऐसा नहीं होता

यकीं कर लूं तेरी बातों का मैं ये सोचता हूँ पर
तू कुछ का कुछ दिखाता है सच ऐसा नहीं होता

छुपा है दिल में जो तेरे; तेरे चेहरे से पढता हूँ
मुझी से क्यूँ छुपाता है सच ऐसा नहीं होता

फितने - शरारतें
उस - खुदा , भगवान्

-शिव 
तू फरेबों की आब-व्-ताब रहा
सच मगर मेरा पुरशबाब रहा

ख्वाब तुझको रहा तेरा ही सफ़र
मेरी मुट्ठी में मेरा ख्वाब रहा

जुबां खामोश और मन में लगन
मुसलसल तुझको ये जवाब रहा

गुनाह लाख दबाये तूने सीने में
में मगर इक खुली किताब रहा

सह गया जुल्मोसितम सब तेरे
अब क्या बाक़ी तेरा हिसाब रहा

* आब-व्-ताब - चमक दमक

-शिव
हवा का प्यारा सा झोंका जो चला 
घुटती साँसों को कुछ करार मिला

साथ आया तू हमसफ़र जबसे
पता मुझको भी मंजिलों का चला

साथ अश्कों के धुल गए शिकवे
बेरुखी कैसी है अब कैसा गिला

तिश्नगी मेरी ना मिटेगी मय से
अपनी आँखों से एक जाम पिला

तेरी आँखें हैं या समन्दर कोई
एक तिनके का सहारा तो दिला

-शिव
Photo: दिल को आराम तेरी आँखों से 
दिल में कोहराम तेरी आँखों से 

तेरी आँखों से मुहब्बत है शुरू 
और अंजाम तेरी आँखों से 

तू लब न खोले मगर लगता है 
मिलते पैग़ाम तेरी आँखों से 

तेरी आँखों से रात दिन हैं मेरे 
ये सुबहो-शाम तेरी आँखों से 

फेर ले आँखें ज़माना तो क्या  
मुझको बस काम तेरी आँखों से 

-शिव
दिल को आराम तेरी आँखों से 
दिल में कोहराम तेरी आँखों से 

तेरी आँखों से मुहब्बत है शुरू 
और अंजाम तेरी आँखों से 

तू लब न खोले मगर लगता है 
मिलते पैग़ाम तेरी आँखों से 

तेरी आँखों से रात दिन हैं मेरे 
ये सुबहो-शाम तेरी आँखों से 

फेर ले आँखें ज़माना तो क्या 
मुझको बस काम तेरी आँखों से 

-शिव

ज़िन्दगी तेरे बिन तसल्ली कर लेगी 
तू मेरी आदत है धीरे धीरे बदलेगी 

आज मुलाक़ात पे ख़ामोशी का पहरा है 
सुनेगी मेरी नज़र तेरी नज़र बोलेगी 

सोचता हूँ तेरी यादों से दोस्ती रखूँ 
कुछ रोज़ तबियत तो ज़रा संभलेगी 

तीरगी तुझसे मिलूँ पहले तू ही आ 
रौशनी फिर कभी मुझसे मिल लेगी

जीत पे अपनी इस कदर ना तू इतरा
ये ज़िन्दगी है रोज़ नए इम्तिहाँ लेगी

-----शिव दीक्षित
1.
मैं ज़र्रा हूँ ज़मीनों का मुझे ठोकर न मारो तुम
मैं ग़र आंधी में बदला तो कहीं तुम हो न जाओ ग़ुम
मैं ढल जाऊं गुबारों में हवाओं में जो मिल जाऊं
निगल सकता हूँ सूरज को होश में आ भी जाओ तुम

गुरूरों की ये ऐंठन सब तेरी मैं ख़त्म कर दूंगा
मेरा परिचय मैं तुझको तेरे अंतिम वक़्त मैं दूंगा
मैं मामूली हूँ; मिट्टी हूँ ये मैं जानता हूँ पर
तू भी खो जाएगा मुझमें और मैं तुझमें होऊंगा

2.
मैं इक बुझता हुआ शोला दफन हूँ राख़ के अन्दर
भड़क सकता हूँ मैं फिर भी अभी तो आग है अन्दर
मिलाता क्यूं है मुझको तू ज़ुल्म की इन हवाओं से
अगर भड़का तो सब है स्वाह सब है खाक़ के अन्दर

दिखा मत तू मुझे चिंगारियां मेरी फितरत में जलना है
सितमगर तू संभल जा ग़र तुझे अब भी संभलना है
तेरी हस्ती को पल में फूँक दूं मैं खाक़ से भर दूं
अगरचे मुझको जलना है समझ ले तुझको जलना है

3.
ये माना मैं हूँ पानी का एक मामूली सा क़तरा
कभी मिल जाऊं दरिया से कभी बादल मैं हूँ उतरा
जो मिल जाऊं दरिया से तो मैं तूफ़ान बनता हूँ
अगर बादल से मिल जाऊं कहर बन के हूँ फटता

मेरी ख़ामोशी को तू मेरी कमजोरी समझना ना
तू उथला जान कर मुझको मेरे अन्दर उतरना ना
अगर अपनी पे आ जाऊं बदलता हूँ मैं तूफाँ में
कभी तूफाँ के मौसम में मेरे रस्ते गुज़रना ना

-शिव
दिल भी कैसी उड़ान भरता है
ज़मीँ को आसमान करता है

उसी को देख कर जीता है कभी
उसी पे दिल कभी ये मरता है

बता दे दिल में दर्द क्या है तेरे
आज कल क्यूं तू इतना हँसता है

इश्क में तू भी सब लुटा बैठा
तेरा चेहरा बयान करता है

तकल्लुफ से न मिला कर मुझसे
तू मुझे अपने ही जैसा लगता है

-शिव
गुज़री बातों मैं ...कोई बात छुपी होती है 
ख़त्म होने मैं …शुरुआत ..कोई होती है 

दिल में जज़्बात का तूफ़ान जब उमड़ता है 
आँखों से अश्कों की बरसात नयी होती है 

अपने माजी पे जमी धूल ...जब हटाता हूँ 
दिल पे ...ज़ख्मों की सौगात नयी होती है 

तेरी चाहत के बिना ..दिल ..बियाबाँ सा है 
दिन कहाँ होता है ...अब रात कहाँ होती है

कौन समझे ज़िन्दगी तेरी हसीन चालों को
शह नयी होती है ..और ..मात नयी होती है

तू रोज़ …पहले से ज्यादा हसीन लगता है
बेवफ़ा मुझको तेरी हर बात नयी लगती है

-शिव
Photo: खौफ तुम ना भरो दिल में मेरे; ऊँचे मुकामों का 
परिंदों को हुनर मालूम होता है उड़ानों का 

घटायें स्याह, गिरती बिजलियाँ, और बारिशें फिर भी 
मुझे सब हाल मालूम है इन ऊँचे आसमानों का 

इल्म की रौशनी है पास, जीने का सलीका है 
मुझे दरकार क्या है और; मैं मालिक हूँ खजानों का 

मज़ा क्या है अगर आसान हर इक राह लगती हो 
मुझे है शौक ऐ दुनिया नामुमकिन निशानों का 

दुआ मुझको जो देते हों जो सर पे हाथ हों रखते 
फ़रिश्ता नाम रखता हूँ मैं ऐसे मेहरबानों का 

-शिव
खौफ तुम ना भरो दिल में मेरे; ऊँचे मुकामों का 
परिंदों को हुनर मालूम होता है उड़ानों का 

घटायें स्याह, गिरती बिजलियाँ, और बारिशें फिर भी 
मुझे सब हाल मालूम है इन ऊँचे आसमानों का 

इल्म की रौशनी है पास, जीने का सलीका है 
मुझे दरकार क्या है और; मैं मालिक हूँ खजानों का 

मज़ा क्या है अगर आसान हर इक राह लगती हो 
मुझे है शौक ऐ दुनिया नामुमकिन निशानों का 

दुआ मुझको जो देते हों जो सर पे हाथ हों रखते 
फ़रिश्ता नाम रखता हूँ मैं ऐसे मेहरबानों का 

-शिव

Photo: मेरी मजबूरियों को समझा कर 
मेरे हबीब मेरा ख्याल इतना कर 

ज़मीन भरोसे की अभी कच्ची है 
कदम संभल के ज़रा रक्खा कर 

मुझमें कुछ मेरा भी तो रहने दे 
 इस क़दर प्यार तू मुझसे ना कर

ऐ मुझे संगदिल कहने वाले 
अपनी गुस्ताखियाँ भी देखा कर 

तेरी नज़दीकियों से आजिज़ हूँ 
ज़िन्दगी अब तू मुझको तनहा कर 

-शिव
मेरी मजबूरियों को समझा कर 
मेरे हबीब मेरा ख्याल इतना कर 

ज़मीन भरोसे की अभी कच्ची है 
कदम संभल के ज़रा रक्खा कर 

मुझमें कुछ मेरा भी तो रहने दे 
इस क़दर प्यार तू मुझसे ना कर

ऐ मुझे संगदिल कहने वाले 
अपनी गुस्ताखियाँ भी देखा कर 

तेरी नज़दीकियों से आजिज़ हूँ 
ज़िन्दगी अब तू मुझको तनहा कर 

-शिव

Photo: बहुत खोया है अब नहीं खोया जाता 
ज़िन्दगी मुझसे अब नहीं रोया जाता 

ऐ! ख़ुदा अब मुझे आज़ाद कर दे 
क़ब्रे-ज़िन्दगी में अब नहीं सोया जाता 

ज़ख्म दिल पर सहो और बहाओ आंसू 
दागे-दिल यूं ही नहीं धोया जाता 

दोस्त दुश्मन हुए अब किस पे ऐतबार करूं 
बोझ रिश्तों का अब नहीं ढोया जाता 

पेशे-खिदमत तो मैं भी होता मगर 
फूल सूखा नहीं माला में पिरोया जाता 

-शिव
बहुत खोया है अब नहीं खोया जाता 
ज़िन्दगी मुझसे अब नहीं रोया जाता 

ऐ! ख़ुदा अब मुझे आज़ाद कर दे 
क़ब्रे-ज़िन्दगी में अब नहीं सोया जाता 

ज़ख्म दिल पर सहो और बहाओ आंसू 
दागे-दिल यूं ही नहीं धोया जाता 

दोस्त दुश्मन हुए अब किस पे ऐतबार करूं 
बोझ रिश्तों का अब नहीं ढोया जाता 

पेशे-खिदमत तो मैं भी होता मगर 
फूल सूखा नहीं माला में पिरोया जाता 

-शिव

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मेरी तकदीर मुझको आफताब बनना है
तीरगी का तेरी मुझको जवाब बनना है।

तेरे पन्नों पे मेहनत से हर्फ़ गढ़ने हैं
जीती जागती मुझको किताब बनना है।

तबस्सुम लानी है तेरे ग़मगीन होठों पर
जश्न-ए-आदम का हसीं सैलाब बनना है।

तेरी ज़फाओं को भी रखता हो वफ़ाओं में
मेहरबां तुझपे हो ऐसा हिसाब बनना है।

दीनोदुनिया के कितने नकाब ओढूं और
बख्श मुझको; मुझे अब बेनकाब बनना है।

आफताब - सूरज
तीरगी - अँधेरा
हर्फ़- शब्द
तबस्सुम - मुस्कराहट
जश्न-ए-आदम - मानव का उत्सव

- शिव
कुछ तुम बढ़ो कुछ हम बढ़ें कम फासले हो जायेंगे
दुश्वारियों में जीने के कुछ हौसले हो जायेंगे

तुम जो करीब न आये तो तनहा रहेगा ये सफ़र
तुम अगर आ जाओ तो संग काफिले हो जायेंगे

तनहा अँधेरे रास्तों पर मंजिलें सब खो गयीं
चले आओ तो रौशनी के सिलसिले हो जायेंगे

हाँ शिकायत मुझको है; ज़िन्दगी से दिल से भी
आकर संभालो तुम इन्हें कम कुछ गिले हो जायेंगे

-शिव
एक टूटा हुआ अरमान हुए जाता हूँ
दिल को बहलाने का सामान हुए जाता हूँ

एक तू है के तवज्जो भी नहीं देता है
एक मैं हूँ के हलकान हुए जाता हूँ

सामना मुझसे हो तो बच के निकल जाते हो
क्या मैं भूली हुई पहचान हुए जाता हूँ

बढ़ गए जुल्मोसितम जब से शहंशाह तेरे
गौर से देख मैं तूफ़ान हुए जाता हूँ

- शिव
ज़िन्दगी तुझको मेरी कोई भी ज़रुरत न हुई
मगर तुझसे मुझे कोई भी शिकायत न हुई

भुलाऊँ तुझको तो लगता था क़यामत होगी
भुलाया तुझको तो कोई भी क़यामत न हुई

किस क़दर मैंने तुझे चाहा तू क्या जाने
कभी तुझको मगर मुझसे मुहब्बत न हुई

पास आती तो तेरी ज़िन्दगी बन जाती मगर
तेरा नसीब तुझको मेरी सोहबत न हुई

एक हम थे के तुझे दिल में बसाया लेकिन
मेरे जज़्बात की तुझको कोई कीमत न हुई

-शिव
क्या मिला तुझसे दिल लगाने से
मुहब्बत कर ली इक फ़साने से।

तनहा दिल;रुसवाई और सुर्ख आँखें 
ये मिला तुझको आजमाने से।

भर गया दिल जो मेरी बातों से
छोड़ कर चल दिए बहाने से।

छोड़ना था तो चुपचाप छोड़ जाते हमें
ज़िक्र क्यूं कर दिया ज़माने से।

-शिव
बाहर के तूफ़ान सब थम जायेंगे 
दिल में इक तूफ़ान होना चाहिए।

यूं भी क्या जीना है खाली दिल लिये 
दिल में कुछ अरमान होना चाहिए।

मुझसे गर उम्मीद है मैं सच कहूं 
तुझमें भी ईमान होना चाहिए।

ये जहाँ तेरा नहीं ‘शिव’ जान ले 
तुझको बस मेहमान होना चाहिए।

-शिव
ना जंग चाहिए ना ज़ोरो-ज़बर
मुहब्बत बादशाहत नहीं होती

मुहब्बत नूर है ख़ुदा का, मुहब्बत जश्ने-ख़ुदा
ये पैग़ाम है अल्लाह का, फकीरों की दुआ

मुहब्बत वक्त की पेशानी पर, 
कभी शीरीं लिखे और कभी फरहाद लिखे
कभी ज़ख्मों का मरहम भी बने
कभी नफरतों के जवाब लिखे

कभी डूब जाए बहते धारों में
दफ्न हो जाए है दीवारों में
और मुहब्बत कभी ख़ुद को ज़िदाबाद लिखे

ये होती है; हो के मिटती है
और फिर होती है मिटने के लिए
ये मुहब्बत है मुहब्बत ज़नाब
इसमें कोई अदावत नहीं होती

कैसे ख़रीदोगे मुहब्बत को चाँदी सोने से
ये सारी कायनात है, मुहब्बत ही के होने से
ये मुहब्बत है इसमें तिजारत नहीं होती

ना जंग चाहिए ना ज़ोरो-ज़बर
मुहब्बत बादशाहत नहीं होती

-शिव
तेरा अहसास सिर्फ़ काफ़ी है
मुझे दीदार की ज़रूरत ही नहीं ।

तू हकीकत से कुछ ज्यादा है
मेरे लिए तू सिर्फ़ हकीकत ही नहीं।

मुझे हैरत है तूने कैसे सुना
अभी मेरे तो लब हिले भी नहीं।

तू यहाँ भी है वहां भी है , हर इक शह में है
तेरा ठिकाना बस मंदिरो-मस्जिद ही नहीं।

-शिव
शोलों पे चल सको तो मेरे हमसफ़र बनो
खुद को बदल सको तो मेरे हमसफ़र बनो

मुश्किल बहुत है मेरी ज़िंदगी का ये सफ़र
गिर के संभल सको तो मेरे हमसफ़र बनो

दरिया में उतरना है और मिटटी का जिस्म है
तुम भी उतर सको तो मेरे हमसफ़र बनो

मुमकिन नहीं है चाँद और तारे में तोड़ लूं
मुझ से बहल सको तो मेरे हमसफ़र बनो

-शिव
बड़ाई दे बड़े होने का पर अहसास ना देना
खुदाया मैं रहूँ छोटा तू बस ऎसी दुआ देना

नीयत मैं कभी मेरी खलल ना ऐ खुदा आए
अंधेरों में भी रोशन हो तू ऐसा रास्ता देना

दोस्तों को तो सीने से लगाते सब ज़माने में
दुश्मनों को भी अपना लूँ तू ऐसा हौसला देना

खैरियत की दुआएं मांगता हो जब कोई तुझसे
तो मेरी भी दुआ उसकी दुआओं में मिला देना

-शिव
माँ का वो बहलाना मुझको याद यूं ही आ जाता है
थाली के पानी में भी जब भी चाँद नज़र आ जाता है।

ये जो मेरे खेल खिलौने ख़ामोशी से बैठे हैं
अपना सारा बचपन मुझको इनमें नज़र आ जाता है।

राजा और रानी का किस्सा लगता था बस किस्सा है
लेकिन अब भी कोई किस्सा सुनने में आ जाता है।

आज समझ में आया मुझको देख के घर की दीवारें
अच्छा ख़ासा घर भी यारो खंडहर क्यूं बन जाता है।
-शिव
तेरी दुनिया से अच्छी हैं 
मेरे कमरे की दीवारें,
मैं तेरी दुनिया से जब मायूस होकर 
थक और टूट जाता हूँ; इसी कमरे की दीवारें मुझे 
अपने आगोश में कुछ यूं छुपाती हैं,
के माँ जैसे बच्चे के सर पे ओढनी रख दे।

वो बिस्तर पर पड़ा तकिया के जिसपे 
माँ के कंधे की तरह 
में सर रख के रो भी लेता हूँ।

वो माँ की गोद के जैसा मेरा प्यारा सा बिस्तर है
के जिस में मुहँ छुपा के मैं
दुनिया से हो के बेगाना,
चैन से सो भी लेता हूँ।

मेरे कमरे का आईना है माँ की आँखों के जैसा
मुझे हिम्मत दिलाता है,मुझे इतना बताता है
के थकना मत तू रुकना मत,

पोंछ के आँसू आँखों के भुला के सारे ग़म अपने
निकल पड़ता हूँ मैं फिर से
तेरी मुश्किल सी दुनिया मैं .....
-शिव
वक़्त करवट बदल रहा है फिर 
कोई गिर कर संभल रहा है फिर ।

आज फिर कुछ खुदा से माँगा है 
कोई घर से निकल रहा है फिर ।

आँख से चंद आंसू टपके हैं 
कोई सपना पिघल रहा है फिर ।

आँख नम हैं कि लब जमे से हैं 
कोई बिछड़ों से रहा है फिर ।

आज कुछ लोगो मुझको समझाओ
कोई अरमां मचल रहा है फिर ।
- शिव
ऐ जिंदगी
तू कभी बहुत दूर कभी पास लगी 
कभी प्यासी और कभी प्यास लगी 
कभी कोमल लगी फूलों की तरह 
और कभी काटों का अहसास लगी ।

ऐ जिंदगी 
तू कभी खिलखिलाती कभी उदास लगी
कभी बेमानी और कभी ख़ास लगी
कभी लगी तू बेवज़ह का सफ़र
और कभी हर चीज़ की वज़ह सी लगी ।

ऐ जिंदगी
तू कभी निराशा और कभी आस लगी
कभी धोखा और कभी विश्वास लगी
कभी लगी तू जीते जी सज़ा मुझको
और कभी ख़ुदा की दुआ सी लगी ।

-शिव
ये कैसी पीड़ा है 
मैं कब इसे पहचानता हूँ ?
पर सुख के सागर के किनारे 
जो मेरे ह्रदय में जल रही है 
उस व्यथा, उस वेदना को 
जाने कब से जानता हूँ !!

-शिव
सारी दुनिया जब बेगानी बन जाती है;
तन्हाई बस मेरी हमदम बन जाती है।

खोलो पंख तो आसमान सारा अपना है;
और समेटो तो बस डाली रह जाती है।

टूटे रिश्ते शायद फिर से जुड़ सकते हैं;
लेकिन गाँठ दिलों में बाकी रह जाती है।

कभी कभी बस इंतज़ार हाथों लगता है; 
रस्ता देखे सारी उम्र गुज़र जाती है।

-शिव
भूख, बीमारी, ज़हालत और न जाने क्या 
ग़ुरबत तेरा कितना बड़ा खानदान है।

मेरी उधारी पे मुझे टोकती है रोज़ 
नुक्कड़ पे जो परचून की छोटी दुकान है।

महंगाई तेरी करनी में कोई कसर नहीं
फिर भी मुझमें अटकी क्यूं ये मेरी जान है।

मैंने ख्वाब देखे मेरा बस ये गुनाह था 
भूल की आँखों ने और दिल पर निशान है।

-शिव
रास्ता मुश्किल बहुत है पर मुझे है दूर जाना 
अब मेरा उददेश्य केवल सत्य स्वप्नों को बनाना।

चाहे प्रलय हो और ये आकाश भी आंसू बहाए 
पर्वतों सा ये ह्रदय क्यूं आँधियों से काँप जाये 
चिन्ह अपने नाश पथ पर अब मुझे है छोड़ जाना।

रंगीनियाँ इस ज़िन्दगी की मुझको यूं क्या बाँध लेंगी 
क्या मेरे आलोक को ये तिमिर छाया घेर लेगी 
अपने सुख की छाया को अब नहीं कारा बनाना।

रास्ता मुश्किल बहुत है पर मुझे है दूर जाना
अब मेरा उददेश्य केवल सत्य स्वप्नों को बनाना।
-शिव
झूठी बातें ये लोग सब बनाते रहे
जो नहीं था वो ही हमें दिखाते रहे।

दोस्त हैं सब कोई नहीं दुश्मन मेरा 
यही धोखा क्यूं बार बार खाते रहे।

मेरे दिल से ये सारी दुनिया छोटी है 
क्यूं इसे तुम बड़ा बताते रहे।

जिंदगी क्या है; अब हम खुद ही देखेंगे 
झूठे सपने सब लोग तो दिखाते रहे।

- शिव

अकेले सारी दुनिया से लड़ने निकल पड़े
जाने किस जूनून में शोलों पे चल पड़े।

मंजिल का नशा; ख्वाबों की आदत सी हो गयी 
कांटे जो चुभे पाँव में तो फूल से लगे।

है इल्म की स्याही; हौसले की कलम है 
लिखने हैं अभी हमको कुछ किस्से बड़े बड़े।

मंजिल पे पहुंचना है तो चलना है ज़रूरी 
मंजिल नहीं मिलती कभी यूं ही खड़े खड़े।

-शिव