कुछ तुम बढ़ो कुछ हम बढ़ें कम फासले हो जायेंगे
दुश्वारियों में जीने के कुछ हौसले हो जायेंगे
तुम जो करीब न आये तो तनहा रहेगा ये सफ़र
तुम अगर आ जाओ तो संग काफिले हो जायेंगे
तनहा अँधेरे रास्तों पर मंजिलें सब खो गयीं
चले आओ तो रौशनी के सिलसिले हो जायेंगे
हाँ शिकायत मुझको है; ज़िन्दगी से दिल से भी
आकर संभालो तुम इन्हें कम कुछ गिले हो जायेंगे
-शिव
दुश्वारियों में जीने के कुछ हौसले हो जायेंगे
तुम जो करीब न आये तो तनहा रहेगा ये सफ़र
तुम अगर आ जाओ तो संग काफिले हो जायेंगे
तनहा अँधेरे रास्तों पर मंजिलें सब खो गयीं
चले आओ तो रौशनी के सिलसिले हो जायेंगे
हाँ शिकायत मुझको है; ज़िन्दगी से दिल से भी
आकर संभालो तुम इन्हें कम कुछ गिले हो जायेंगे
-शिव
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