ये वक़्त ये नसीब
जैसे क़र्ज़ माँगा हो
और इस क़र्ज़ को
चुकाऊँ तो चुकाऊँ कैसे
जीता तो हूँ पर
ज़िन्दगी मेरी नहीं
कमी सब कुछ और लगता है
कोई कमी भी नहीं
ये अन्धेरा और
रौशनी का कोई सुराग़ नहीं
मेरे सवालों का
कोई भी जवाब नहीं
ऐ! ख़ुदा कोई राह दिखा
अब तो लगता है
इस रात की
कोई सुबह ही नहीं
और इस आज का
कोई कल ही नहीं
-शिव
जैसे क़र्ज़ माँगा हो
और इस क़र्ज़ को
चुकाऊँ तो चुकाऊँ कैसे
जीता तो हूँ पर
ज़िन्दगी मेरी नहीं
कमी सब कुछ और लगता है
कोई कमी भी नहीं
ये अन्धेरा और
रौशनी का कोई सुराग़ नहीं
मेरे सवालों का
कोई भी जवाब नहीं
ऐ! ख़ुदा कोई राह दिखा
अब तो लगता है
इस रात की
कोई सुबह ही नहीं
और इस आज का
कोई कल ही नहीं
-शिव
No comments:
Post a Comment