ज़िन्दगी तुझको मेरी कोई भी ज़रुरत न हुई
मगर तुझसे मुझे कोई भी शिकायत न हुई
भुलाऊँ तुझको तो लगता था क़यामत होगी
भुलाया तुझको तो कोई भी क़यामत न हुई
किस क़दर मैंने तुझे चाहा तू क्या जाने
कभी तुझको मगर मुझसे मुहब्बत न हुई
पास आती तो तेरी ज़िन्दगी बन जाती मगर
तेरा नसीब तुझको मेरी सोहबत न हुई
एक हम थे के तुझे दिल में बसाया लेकिन
मेरे जज़्बात की तुझको कोई कीमत न हुई
-शिव
मगर तुझसे मुझे कोई भी शिकायत न हुई
भुलाऊँ तुझको तो लगता था क़यामत होगी
भुलाया तुझको तो कोई भी क़यामत न हुई
किस क़दर मैंने तुझे चाहा तू क्या जाने
कभी तुझको मगर मुझसे मुहब्बत न हुई
पास आती तो तेरी ज़िन्दगी बन जाती मगर
तेरा नसीब तुझको मेरी सोहबत न हुई
एक हम थे के तुझे दिल में बसाया लेकिन
मेरे जज़्बात की तुझको कोई कीमत न हुई
-शिव
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