वक़्त करवट बदल रहा है फिर
कोई गिर कर संभल रहा है फिर ।
आज फिर कुछ खुदा से माँगा है
कोई घर से निकल रहा है फिर ।
आँख से चंद आंसू टपके हैं
कोई सपना पिघल रहा है फिर ।
आँख नम हैं कि लब जमे से हैं
कोई बिछड़ों से रहा है फिर ।
आज कुछ लोगो मुझको समझाओ
कोई अरमां मचल रहा है फिर ।
- शिव
कोई गिर कर संभल रहा है फिर ।
आज फिर कुछ खुदा से माँगा है
कोई घर से निकल रहा है फिर ।
आँख से चंद आंसू टपके हैं
कोई सपना पिघल रहा है फिर ।
आँख नम हैं कि लब जमे से हैं
कोई बिछड़ों से रहा है फिर ।
आज कुछ लोगो मुझको समझाओ
कोई अरमां मचल रहा है फिर ।
- शिव
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