ऐ जिंदगी
तू कभी बहुत दूर कभी पास लगी
कभी प्यासी और कभी प्यास लगी
कभी कोमल लगी फूलों की तरह
और कभी काटों का अहसास लगी ।
ऐ जिंदगी
तू कभी खिलखिलाती कभी उदास लगी
कभी बेमानी और कभी ख़ास लगी
कभी लगी तू बेवज़ह का सफ़र
और कभी हर चीज़ की वज़ह सी लगी ।
ऐ जिंदगी
तू कभी निराशा और कभी आस लगी
कभी धोखा और कभी विश्वास लगी
कभी लगी तू जीते जी सज़ा मुझको
और कभी ख़ुदा की दुआ सी लगी ।
-शिव
तू कभी बहुत दूर कभी पास लगी
कभी प्यासी और कभी प्यास लगी
कभी कोमल लगी फूलों की तरह
और कभी काटों का अहसास लगी ।
ऐ जिंदगी
तू कभी खिलखिलाती कभी उदास लगी
कभी बेमानी और कभी ख़ास लगी
कभी लगी तू बेवज़ह का सफ़र
और कभी हर चीज़ की वज़ह सी लगी ।
ऐ जिंदगी
तू कभी निराशा और कभी आस लगी
कभी धोखा और कभी विश्वास लगी
कभी लगी तू जीते जी सज़ा मुझको
और कभी ख़ुदा की दुआ सी लगी ।
-शिव
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