गुज़री बातों मैं ...कोई बात छुपी होती है
ख़त्म होने मैं …शुरुआत ..कोई होती है
दिल में जज़्बात का तूफ़ान जब उमड़ता है
आँखों से अश्कों की बरसात नयी होती है
अपने माजी पे जमी धूल ...जब हटाता हूँ
दिल पे ...ज़ख्मों की सौगात नयी होती है
तेरी चाहत के बिना ..दिल ..बियाबाँ सा है
दिन कहाँ होता है ...अब रात कहाँ होती है
कौन समझे ज़िन्दगी तेरी हसीन चालों को
शह नयी होती है ..और ..मात नयी होती है
तू रोज़ …पहले से ज्यादा हसीन लगता है
बेवफ़ा मुझको तेरी हर बात नयी लगती है
-शिव
ख़त्म होने मैं …शुरुआत ..कोई होती है
दिल में जज़्बात का तूफ़ान जब उमड़ता है
आँखों से अश्कों की बरसात नयी होती है
अपने माजी पे जमी धूल ...जब हटाता हूँ
दिल पे ...ज़ख्मों की सौगात नयी होती है
तेरी चाहत के बिना ..दिल ..बियाबाँ सा है
दिन कहाँ होता है ...अब रात कहाँ होती है
कौन समझे ज़िन्दगी तेरी हसीन चालों को
शह नयी होती है ..और ..मात नयी होती है
तू रोज़ …पहले से ज्यादा हसीन लगता है
बेवफ़ा मुझको तेरी हर बात नयी लगती है
-शिव
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