क्या हुआ जो फिर समूहों मैं अकेला रह गया मैं
क्या हुआ जो आज फिर से अश्रुओं संग बह गया मैं
क्या हुआ संसार मुझको फिर अकेला छोड़ आया
क्या हुआ जो फिर अमा बन घेरती है कष्ट छाया
बस मेरी इक प्रार्थना स्वीकार तू कर ले इसे
संसार तू मेरे लिए अपने कदम मत रोकना
अपने ह्रदय के द्वार फिर मेरे लिए मत खोलना
शून्य मैं जो खो सके हाँ मैं नहीं हूँ वो कथा
मेरा ह्रदय न सह सके ऐसी नहीं मेरी व्यथा
आज जो मृत प्राय: से हैं स्वप्ना मेरे कल उठेंगे
नयन की चिंगारियों से बुझते दीपक जल उठेंगे
पर मेरी यह प्रार्थना प्रार्थना स्वीकार तू कर ले इसे
संसार तू मेरे लिए अपने कदम मत रोकना
अपने ह्रदय के द्वार फिर मेरे लिए मत खोलना
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