जाने क्यूं अब सारे रिश्ते
लेनदेन वाले लगते हैं
लगता है बस सारे रिश्ते
लेन देन तक ही चलते हैं
जब तक मैं देने लायक था
मेरे घर की चौखट पर भी
लोगों के मेले लगते थे
अपने भी वो दुखडा रोते
हालचाल मेरे सुनते थे
आज उसी चौखट पर तनहा
तनहा बैठा सोच रहा हूँ
सारे रिश्ते टूट गए क्यूं
मेले वाले मेरे साथी
जाने मुझसे रूठ गए क्यूं
शायद इसकी एक वजह है
मेरा खाली खाली दामन
फिर भी मैं उनसे कहता हूँ
जब भी तुमको कुछ लेने हो
पास मेरे फिर से आ जाना
हल पूछने मुझसे मेरे
और अपने भी हाल सुनना
फिर से हम सब अजनबियों से
रिश्ते वाले बन जायेंगे
फिर से घर की चौखट पर
कुछ लोगों के मेले से लगेंगे
मीठी मीठी बातों के कुछ जाले
फिर से लोग बुनेंगे
पर मुझे ख़बर है वो रिश्ते भी
बस तब तक ही चल पायेंगे
जब तक कुछ मेरे दामन मैं ऐसा होगा
जो मैं उनको दे सकता हूँ
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