सारी दुनिया जब बेगानी बन जाती है;
दीवारों मैं भी इक दुनिया बन जाती है/
कभी कभी बस इंतज़ार हाथों लगता है;
रास्ता देखे सारी उम्र गुज़र जाती है/
दीवारों मैं भी इक दुनिया बन जाती है/
कभी कभी बस इंतज़ार हाथों लगता है;
रास्ता देखे सारी उम्र गुज़र जाती है/
Good...Now you are on Technology edge..
ReplyDeleteWell Said Sir,
ReplyDeleteMahesh Dixit